बदलावों का पदार्पण हमारे समाज को कुछ अच्छे और कुछ बुरे परिस्थितिया से अवगत कराता हैं ,जिसका हमारी सोच और रहन-सहन पे सीधा असर पड़ता हैं । इन दिनों हमारे भारतीय समाज में लडकियों के प्रति जो नजरिया उदीप्त हुआ हैं इससे अपने समाज की जितनी आलोचना की जाये कम हैं ,
कुछ लोग अपने मस्तिस्क विकारो के कारण लड़कियों के छोटे कपड़ो को नंग्नता और खुलेपन की दृष्टी से देख रहे हैं , क्योकि उनका कुढा हुआ मस्तिस्क स्त्रियों को बुर्के या साड़ियो में ढके हुए पुतले की तरह ही समझना चाहता हैं ।
ऐसे विकृत मस्तिस्क का भविष्य में बढ़ने से रोकने के लिए कुछ समुचित कदम उठाने जरुर चाहिए, अगर हम इसकी शुरुआत स्कुलो से करे,और इन्हें कुछ विषयों के माध्यम से समझाया जाये तो शर्तिया हमारे देश का उथान निश्चित हैं और ,तभी हमारे समाज से बलात्कार ,छेड़छाड़ और अनगिनत अपराध का अंत सम्भव हो सकता हैं ।
p.p :)
कुछ लोग अपने मस्तिस्क विकारो के कारण लड़कियों के छोटे कपड़ो को नंग्नता और खुलेपन की दृष्टी से देख रहे हैं , क्योकि उनका कुढा हुआ मस्तिस्क स्त्रियों को बुर्के या साड़ियो में ढके हुए पुतले की तरह ही समझना चाहता हैं ।
ऐसे विकृत मस्तिस्क का भविष्य में बढ़ने से रोकने के लिए कुछ समुचित कदम उठाने जरुर चाहिए, अगर हम इसकी शुरुआत स्कुलो से करे,और इन्हें कुछ विषयों के माध्यम से समझाया जाये तो शर्तिया हमारे देश का उथान निश्चित हैं और ,तभी हमारे समाज से बलात्कार ,छेड़छाड़ और अनगिनत अपराध का अंत सम्भव हो सकता हैं ।
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