बड़ा ही मार्मिक चित्रण लगा हैं मुझे इसलिए पोस्ट कर दिया , जो आज के समाज पे बखूबी लागू होता हैं , दो लाइने ही लिख पाया पर दिल के गहरइयो से लिखा हैं| धन्यवाद !!
"माँ का दुलार और बेटे का अत्याचार "
कभी खुशियों का समुन्दर था समाया जहां , आज दुखो का मंजर छाया रहता है वहाँ !!
कभी न आने पाया दुखों का आँच जिस पर ,आज वही (बेटा ) छोड़ा हैं उन्हें(माँ ) आँच में वहाँ !! p.p
"माँ का दुलार और बेटे का अत्याचार "
कभी खुशियों का समुन्दर था समाया जहां , आज दुखो का मंजर छाया रहता है वहाँ !!
कभी न आने पाया दुखों का आँच जिस पर ,आज वही (बेटा ) छोड़ा हैं उन्हें(माँ ) आँच में वहाँ !! p.p
No comments:
Post a Comment