Dedicated to all my lovely friends on celebration of friendship day ......................
मै अंजान था की वो क्या था
जो रिश्ता मुझसे जुड़ गया था
बचपन के खेल-२ में
जो मुझे आकर मिल गया था
जाने वो क्या जज्बात था
उस रिश्ते में क्या बात था
शायद वो रिश्ता मेरी लिए कुछ खास था.........
वो पल जैसे खुशियों की दीवाली थी
जहाँ मस्ती और भी मतवाली थी
जब खिलती थी चहक एक दुसरे पर
तो हँसी मोतिया बन चेहरे पे खिल जाती थी
उस अनमोल पल को
करू तो करू कैसे बयां ,जनाब!
बस यू समझिये ,
हर चेहरा फूलो से सज़ा गुलदस्ता नज़र आता था। .....
इस रिश्ते की चमक बता रही थी
जो दिल में जगह बना रही थी
खुशबु जिसकी छा रही थी
शायद इसी रिश्ते को "दोस्ती" की पुकार आ रही थी -2
.............................. ............................ p.p
मै अंजान था की वो क्या था
जो रिश्ता मुझसे जुड़ गया था
बचपन के खेल-२ में
जो मुझे आकर मिल गया था
जाने वो क्या जज्बात था
उस रिश्ते में क्या बात था
शायद वो रिश्ता मेरी लिए कुछ खास था.........
वो पल जैसे खुशियों की दीवाली थी
जहाँ मस्ती और भी मतवाली थी
जब खिलती थी चहक एक दुसरे पर
तो हँसी मोतिया बन चेहरे पे खिल जाती थी
उस अनमोल पल को
करू तो करू कैसे बयां ,जनाब!
बस यू समझिये ,
हर चेहरा फूलो से सज़ा गुलदस्ता नज़र आता था। .....
इस रिश्ते की चमक बता रही थी
जो दिल में जगह बना रही थी
खुशबु जिसकी छा रही थी
शायद इसी रिश्ते को "दोस्ती" की पुकार आ रही थी -2
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