Sunday, 1 January 2017


बहकता हूँ,
फिसलता हूँ,
लुढ़कता हूँ,
बिखरता हूँ,
जुड़ता हूँ,
उठता हूँ,
संभलता हूँ,
और फिर
चलता हूँ,
शिकायत नही हैं
किसी से, क्योंकि
हर एक पल
मैं सीखता हूँ.......
......@प्रवीण पाण्डेय