इस ब्लॉग "मनरंग" का उददेश्य मेरे मन में उठे हुए असख्य कोंपले, जो मेरे शब्दों के माध्यम से कुछ कविताओ के रूप में , तो कुछ नई सोच के रूप में आपसे रूबरू कराते हुए आपके मानसपटल को तरो- ताजा और खुशनुमा बनाने की कोशिश करते रहना । आपका मेरे ब्लॉग से जुड़े रहने के लिए आभारी हूँ । आपका बहुत-बहुत धन्यवाद ! ………… :)
Friday, 9 August 2013
कुछ पल के लिए ठहर जा ये समय के परिंदे , ये तो हमारे मिलन की घड़ी हैं ! रुक जा वही तू ,जी भर देख लेने दे, देखता नहीं , सामने मेरी महबूबा खड़ी हैं !! p .p —
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