Friday, 9 August 2013

आज मेट्रो की यात्रा के दौरान ये कुछ पक्तिया मन में आ गया अच्छा लगे तो कमेंट दीजियेगा 
"मेट्रो में हमसफ़र "
मेट्रो के सफ़र में हमसफ़र ढूढ़ता हूँ !

हर स्टेशन को शीशे से नजर फेरता हूँ ,
कोई आता हैं कोई जाता हैं ,कोई दिल में शमा जाता हैं 
पर मै दिल पे रख के हाथ फिर आगे बढ़ जाता हूँ 
फिर सोचा मेट्रो में भी देख लेता हूँ ,नजरो से टटोल लेता हूँ 
कुछ बेरुखी थी ,कुछ शरमाई सी , कुछ पे मासुमियत भी छाई थी !
पर शायद अब भी ख्वाब अधूरे थे वो अब भी न मुझे मिल पाई थी ,
इस जोश के साथ बढ़ता जा रहा हूँ और मेट्रो का सफ़र, हमसफ़र की तलाश में करता जा रहा हूँ ...... 
p.p

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