Sunday, 11 August 2013

                   " माँ " 
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बेटा उठ जाओ स्कूल जाना हैं
कुछ इसी आवाज के साथ मेरे दिन की शुरुआत होती हैं
कितनी बार गूंजती ये मेरी कानो में
हर बार उठ जाती माँ के बोल के साथ
और लेट जाती माँ के बोल के अंत होने के साथ।
अगले ही पल गूंज उठी कानो में
अशोभती आवाजो की टनकार पापा की
और बोल गये ये शब्द "रिया उठो जल्दी अब "
ये शब्द सुन हो खड़ी हुई जैसे
मनो सोई ना थी कुछ देर पहले जैसे
मौसम में ठंडी का एहसास था
नहाने के लिए मौसम उदास था
न नहाने की सोची ही था
की पापा मुझे बाथरूम में ले खड़ा कर गये
उसके साथ उड़ेल दिए दो मग पानी से भरे
आ गई सिसकिया माँ के पुकार के साथ
आश थी मन में हर सिसकियो के साथ
माँ आ गई थी सुन आश मेरी
आते ही छिप गया मै उसकी गोद में आँचल के साथ
भूल बैठी सिसकियो को
नरम हथेलियों की गर्माहट संग
बिखेर दी मुस्कान चेहरे पे मेरे
अपने ममतामई ठिठोलियो संग
जान गयी थी आज माँ के उस रूप को
जो चर्चाओं में सुना करती थी कभी .............................. P.p 
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माँ,माँ होती हैं
माँ बच्चो के लिए दुआ होती हैं
माँ के ममतामई हिर्द्य का कोई जोड़ नहीं होता
इसलिए माँ के जगह का किसी में होड़ नहीं होता
 — feeling special.

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