Wednesday, 27 November 2013

लबों पे मुस्कान लेकर हर तरफ गया
 फिर भी ज़माने से हाय ! मिली ,तो ये मुस्कान "कैसी"

जिनके खुशियों के खातिर ये दौलत कमाई
 वही रूठ गए तो ये मुस्कान "कैसी "


माँ के आँचल को तूने दगा जब दिया
दुनिया के लिए ये झूठी मुस्कान "कैसी" 


 जाते-२  अखियों में अस्को की धारा छोड़ गये
फिर मुरझाई अखियों के लिए ये  मुस्कान "कैसी "

        ............................................P.p

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