जब देखो कुछ लोग दूसरे की बात करते हैं
अपनी छोड़ दुसरो के फेर में रहते हैं
इनकी मूंगफली खाने की औकात नहीं
पर घमंड करोड़ो की रखते हैं
इनकी जाति मिल जाती हैं ऐसे ही किसी नुकक्ड़ ,चौराहे पे
उन लब्जो के चन्द बानगी भर से पहचान जायेंगे
क्या लिखू ,इनके तराने बड़े बेवकूफी भरे होते हैं
पर हाय! रे ये जहाँ ,ऐसे लोगो के साथ भी कुछ लोग खड़े रहते हैं .................................. :)
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