Saturday, 16 November 2013

जब भी याद आती हो , हम  उन लम्हो में मसरूफ पाते हैं !
 दिल के आईने की तस्वीर , पलकों से छन जाते हैं  !!
P.P
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जस लोढ़त माली फ़ुलवन को सजावे खातिर मलवन क शोभा !
 तस कवि लोढ़े लागल शब्दों को सजावे खातिर कब्यन क शोभा !!  P.P

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