Saturday, 29 March 2014

                                            " समाधान या कन्या दान "
समलैंगिकता को लेकर सबकी अपनी -२ राय हैं। नए -२ तार्किक बिंदु उधेड़ , बुन का काम कर रही हैं , नए -२ खोजो के साथ इनोवेटिव उपस्थिति हर क्षेत्र में जरुरत बन गई हैं संसार इस युग को इनोवेटिव एरा कहे तो अतिश्योक्ति न होगी। पर इन दिनों बदलाव को लेकर एक नई ब्यार बह रही हैं। .... 'गे' समुदाय में सेक्स एक इनोवेटिव विचार आया हैं जिसे हम अप्रकीर्तिक सेक्स समझते हैं …… हमारे पूर्वजों ने ये कभी नहीं सोचा होगा की ये इस तरह के रिश्ते भी पनप सकते हैं और उसमे ऐसा भी इनोवेटिव विचार आ सकता है। .... बहरहाल "परिवर्त्तन ही संसार का नियम हैं " इसपे काबिज़ होकर आगे बढ़ते। । गे समुदाय को मिली राहत को साढ़े चार साल ही बीते थे की हमारे समुदाये के प्रमुख जातियो के अनुवाइयो (हिंदू, मुस्लिम , इसाई) ने 'गे' समुदाय के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। .......... इससे ये पता चलता हैं कि हिन्दू , मुस्लिम ,ईसाई में एकता हो सकती हैं  … और दिसम्बर २०१३ में इस सम्बन्ध को गैर-संवैधानिक मानते हुए अप्रकीर्तिक सेक्स को भारतीय दंड संहिता में दोषी करार दिया …। वैसे बात करे अगर धरा ३७७ की तो इसमें कई लूपहोल हैं पहले तो हैं कि लेस्बियन पे ये लागू ही नहीं हो पायेगा
फिर दुबारा करीब ७६ तार्किक बिन्दुयों के साथ केंद्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय को पुनः विचार के लिए याचिका डाली हैं। केंद्र सरकार पहले से ही गे समुदाये के साथ खड़ी थी
अब देखना ये हैं कि इस याचिका पर उच्चतम न्यायालय विचार अडिग रहेगा या बदलाव की गुंजाईश हैं। …। ये तो आने वाला वक्त बतायेगा , पर अगर उच्चतम न्यायालय का फैसला बदल गया तो। … कितना हद तक हमारा समाज इस बदलवा को स्वीकार करेगा ये तो आने वाला वक्त बतायेगा। ............. प्रवीण पाण्डेय एक सोच, एक नजरिया !!!!

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