इस ब्लॉग "मनरंग" का उददेश्य मेरे मन में उठे हुए असख्य कोंपले, जो मेरे शब्दों के माध्यम से कुछ कविताओ के रूप में , तो कुछ नई सोच के रूप में आपसे रूबरू कराते हुए आपके मानसपटल को तरो- ताजा और खुशनुमा बनाने की कोशिश करते रहना । आपका मेरे ब्लॉग से जुड़े रहने के लिए आभारी हूँ । आपका बहुत-बहुत धन्यवाद ! ………… :)
Sunday, 1 January 2017
बहकता हूँ, फिसलता हूँ, लुढ़कता हूँ, बिखरता हूँ, जुड़ता हूँ, उठता हूँ, संभलता हूँ, और फिर चलता हूँ, शिकायत नही हैं किसी से, क्योंकि हर एक पल मैं सीखता हूँ....... ......@प्रवीण पाण्डेय
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