खुद को जलाया था जिसे रौशनी देने के लिए!
आज वही कहने लगा मुझे देख जलता हैं, यारों!!
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लब्ज़ अनेको थे ज़ेहन में सर उठाये!
पर मेरा पढ़ना वहाँ काम आ गया!!
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दफ़नाने गये थे गम की पोटली काँधे लेकर!
तरसता हुआ घर वापस आया आँखों पर जाले लेकर!!
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ये रात ,ये दिन ,ये चैनो अमन का खजाना!
कहाँ ये मिलते हैं यारो जरा हमें भी बताना !!
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आज वही कहने लगा मुझे देख जलता हैं, यारों!!
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लब्ज़ अनेको थे ज़ेहन में सर उठाये!
पर मेरा पढ़ना वहाँ काम आ गया!!
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दफ़नाने गये थे गम की पोटली काँधे लेकर!
तरसता हुआ घर वापस आया आँखों पर जाले लेकर!!
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ये रात ,ये दिन ,ये चैनो अमन का खजाना!
कहाँ ये मिलते हैं यारो जरा हमें भी बताना !!
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